आज सोचा ..

आज सोचा दूसरी तरफ मुँह करके भी मुस्कुरा लूँ ,

अब तक अपने में खुश था, आज दुनिया को भी बतला दूँ। 

ग़म की परछाइयों से दूर जो आशियाँ बनाया है मैंने,

आज यारों के साथ वहाँ महफ़िल सजा लूँ। 

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