एक नयी सुबह फिर होने को है
ये रात अब ख़त्म होने को है
एक नयी सुबह फिर होने को है
इस रात में जला दिए हैं मैंने कई अफ़साने
एक काली चादर से ढक दिए हैं अपने ग़म के बहाने
सफ़ेद चांदनी से धो दिए हैं गुनाह सब पुराने
खुद से अब कोई जिरह नहीं है बाकी
ना ही शराब है और ना कोई साक़ी
दे चूका हूँ जितनी देनी थी खुद को सज़ा
अब जीने को जी चाहता है इसलिए
इंतेजा है ये तुझसे, ऐ क़ज़ा
लौट जा तू सितारों में फिर से
तुझसे जो इश्क़ मैंने किया था कभी
उसकी मियाद अब ख़त्म होने को है
एक नयी सुबह फिर होने को है..
एक नयी सुबह फिर होने को है
इस रात में जला दिए हैं मैंने कई अफ़साने
एक काली चादर से ढक दिए हैं अपने ग़म के बहाने
सफ़ेद चांदनी से धो दिए हैं गुनाह सब पुराने
खुद से अब कोई जिरह नहीं है बाकी
ना ही शराब है और ना कोई साक़ी
दे चूका हूँ जितनी देनी थी खुद को सज़ा
अब जीने को जी चाहता है इसलिए
इंतेजा है ये तुझसे, ऐ क़ज़ा
लौट जा तू सितारों में फिर से
तुझसे जो इश्क़ मैंने किया था कभी
उसकी मियाद अब ख़त्म होने को है
एक नयी सुबह फिर होने को है..
Wow Arun bhaiya.. this is amazing..
ReplyDelete