मेरा ख्वाब

कौन कहता है ज़िन्दगी एक हसीन ख्वाब है,
मैंने कल ही उसे रोते हुए देखा था.
उसने कहा की मैं ख्वाब नहीं देखूंगी अब कोई,
किस्मत की लकीरों को सच मान कर जिंदा रह लूंगी.
बीती बातें झूठा सपना थी जो टूट गया आँखों के खुलते ही,
संजो के रखा था कब से जो पलकों पर मैंने,
आज आंसुओं के साथ बह जाने दूँगी.

ज़िन्दगी एक हसीन ख्वाब है,
सुना था मैंने भी कहीं,
पर सपने सच भी होते हैं कभी देखा नहीं था.
आज फिर एक सपना बुना है मैंने,
उसकी आँखों पर भी सजा दिया है उसे.
इस बार ये ख्वाब टूटेगा नहीं,
इस बार ये दिल रूठेगा नहीं,
इस बार मैं खुल के हंसूंगी,
लहरों में स्वछन्द बहूंगी.

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