टूटे हुए दिल की आह ना सुनी तूने

टूटे हुए दिल की आह ना सुनी तूने,
तो क्या जो वो बेआवाज़ निकली.
मेरी आँखों में छिपे आंसू भी ना देख पाया तू,
तो क्या जो पलकें मेरी भीगीं ना थीं.
मैं तो समझा कि बहुत नज़दीक है तू मेरे,
तो क्या जो ख्यालों में दूरियां निकलीं.
चाहता हूँ तुझे आज भी दिलरुबा की तरह,
तो क्या जो तेरे दिल में मेरे लिए नफरतें निकलीं.
खुद से ना मिलने की सज़ा मुक़र्रर की है तूने...
आज अपने ग़म का सबब तलाश किया जो,
तो पाया की वो मेरे दिल की मजबूरी निकली.

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