मर गया आज एक और कहीं
मर गया आज एक और कहीं
खो गया लाशों के ढेर में
खून से सरोबार उस चेहरे पर
अब डर के सिवा कुछ भी नहीं
कुछ कर जाने की ख्वाहिश दिल में लिए
सपनों की उड़ान भरने को तैयार
निकला वो अनजान सड़कों पे
की अचानक हुआ मौत का वार
थम गया सब रुक गयी हवाएँ
कैसा मंज़र तुम्हें क्या बताएं
बिखरे फूल उठाने को भी कोई नहीं
खून से सरोबार उस चेहरे पर
अब डर के सिवा कुछ भी नहीं
खो गया लाशों के ढेर में
खून से सरोबार उस चेहरे पर
अब डर के सिवा कुछ भी नहीं
कुछ कर जाने की ख्वाहिश दिल में लिए
सपनों की उड़ान भरने को तैयार
निकला वो अनजान सड़कों पे
की अचानक हुआ मौत का वार
थम गया सब रुक गयी हवाएँ
कैसा मंज़र तुम्हें क्या बताएं
बिखरे फूल उठाने को भी कोई नहीं
खून से सरोबार उस चेहरे पर
अब डर के सिवा कुछ भी नहीं
Such deep thoughts.. Loving it..
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